क्या आपको अपने बचपन की वो कहानियाँ याद हैं, जिनमें जानवर इंसानों की तरह बात करते थे और हर कहानी के अंत में एक गहरी सीख छिपी होती थी? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं पंचतंत्र की 5 कहानियाँ (Panchatantra) की।
हजारों साल पहले आचार्य विष्णु शर्मा ने राजा के तीन राजकुमारों को राजनीति और व्यवहारिक ज्ञान सिखाने के लिए इन कहानियों की रचना की थी। लेकिन आज भी, इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के युग में, पंचतंत्र की कहानियाँ उतनी ही प्रासंगिक और महत्वपूर्ण हैं।

अगर आप हिंदी साहित्य और नैतिक कहानियों की तलाश में हैं, तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं पंचतंत्र की वो 5 चुनिंदा कहानियाँ, जो न केवल मनोरंजन करेंगी बल्कि आपको जीवन के मुश्किल फैसलों में सही राह भी दिखाएंगी। चलिए, कहानियों की इस दुनिया में खो जाते हैं:-
पंचतंत्र की 5 कहानियाँ क्या है? | Panchtantra ki Kahaniyan
अक्सर हम सोचते हैं कि पंचतंत्र की 5 कहानियां (Panchatantra) केवल बच्चों के मनोरंजन के लिए लिखी गई कहानियों की किताब है। लेकिन सच तो यह है कि यह दुनिया की सबसे पुरानी और प्रभावशाली ‘नीति-शास्त्र’ (Management & Strategy Book) है।
‘पंचतंत्र’ नाम का अर्थ:-
यह शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है:-
- पंच (Paanch) = पाँच (Five)
- तंत्र (Tantra) = सिद्धांत या नियम (Principles/Systems)
अर्थात्, जीवन को सफल बनाने के पाँच सिद्धांत। पंडित विष्णु शर्मा ने इस ग्रंथ को 5 अलग-अलग भागों में बांटा है, जिन्हें ‘तंत्र’ कहा जाता है। आइए, इनके बारे में आसान भाषा में समझते हैं:-
पंचतंत्र की 7 प्रसिद्ध कहानियाँ का वर्णन | Panchtantra Ki Kahaniyan in Hindi
| क्र.सं. | कहानी का नाम(Panchatantra) | मुख्य पात्र | कहानी का सार(Summary) | नैतिक शिक्षा(Moral) |
| 1 | शेर और चतुर खरगोश | शेर (भासुरक), खरगोश | एक नन्हे खरगोश ने अपनी चतुराई से अत्याचारी शेर को कुएँ में अपनी परछाई दिखाकर गिरा दिया। | बुद्धि शारीरिक बल से हमेशा श्रेष्ठ होती है। |
| 2 | बंदर और मगरमच्छ | बंदर (रक्तमुख), मगरमच्छ | मगरमच्छ ने धोखे से बंदर का कलेजा खाना चाहा, लेकिन बंदर ने अपनी ‘उपस्थित बुद्धि’ से जान बचाई। | संकट के समय घबराने की बजाय दिमाग से काम लेना चाहिए। |
| 3 | तीन मछलियाँ | तीन मछलियाँ | भाग्य के भरोसे रहने वाली मछली जाल में फँस गई, जबकि सतर्क और योजना बनाने वाली मछलियाँ बच गईं। | भाग्य के भरोसे हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठना चाहिए। |
| 4 | ब्राह्मण और नेवला | ब्राह्मणी, नेवला, साँप | ब्राह्मणी ने गलतफहमी में उस वफादार नेवले को मार दिया, जिसने उसके बच्चे को साँप से बचाया था। | जल्दबाजी और क्रोध में बिना सोचे-समझे काम नहीं करना चाहिए। |
| 5 | बातूनी कछुआ | कछुआ, दो हंस | उड़ते समय हंसों द्वारा मना करने के बावजूद कछुए ने बोलने के लिए मुँह खोला और गिरकर मर गया। | बिना समय और परिस्थिति देखे बोलना विनाश का कारण बनता है। |
| 6 | रंगा सियार | नीला सियार, जानवर | एक सियार रंग में रंगकर राजा बन बैठा, लेकिन उसकी अपनी ही आवाज़ (हुआं-हुआं) ने उसका झूठ पकड़वा दिया। | झूठ और बनावटी भेष ज्यादा दिन नहीं टिकते। |
| 7 | हाथी और चूहे | गजराज (हाथी), चूहे | विशाल हाथियों को शिकारियों के जाल से नन्हे चूहों ने रस्सियाँ काटकर बचाया। | छोटे से छोटे व्यक्ति का भी अपना महत्व होता है, उन्हें कम न आंकें। |
1. शेर और चतुर खरगोश | The Lion and the Clever Rabbit Story of Panchatantra
(सीख: शारीरिक बल से बड़ी बुद्धि होती है)
एक समय की बात है, जंगल में भासुरक नाम का एक शेर रहता था। वह बहुत क्रूर था और अपनी भूख मिटाने के लिए रोज़ कई जानवरों को मार डालता था। जंगल के सभी जानवर उससे परेशान थे। उन्होंने मिलकर शेर से विनती की कि वह रोज़ शिकार पर न निकले, बदले में जानवर खुद रोज़ एक-एक करके उसके पास भोजन बनने आएँगे। शेर मान गया।
एक दिन एक छोटे से खरगोश की बारी आई। वह जानबूझकर शेर के पास बहुत देर से पहुँचा। भूखा शेर गुस्से से आग-बबूला हो रहा था। उसने खरगोश से देरी का कारण पूछा।
खरगोश ने हाथ जोड़कर कहा, “महाराज, मैं तो समय पर आ रहा था, लेकिन रास्ते में मुझे एक दूसरे शेर ने रोक लिया। वह खुद को इस जंगल का राजा बता रहा था और आपको ललकार रहा था।”
यह सुनते ही भासुरक का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने कहा, “चलो, मुझे उस दूसरे शेर के पास ले चलो।” खरगोश उसे जंगल के एक गहरे कुएँ के पास ले गया और बोला, “महाराज, वह इसी किले (कुएँ) में छिपा है।”
शेर ने कुएँ में झाँका। उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखाई दी। गुस्से में उसने अपनी ही परछाई को दूसरा शेर समझा और उसे मारने के लिए कुएँ में छलांग लगा दी। इस तरह, अपनी बुद्धिमानी से नन्हे खरगोश ने पूरे जंगल को उस अत्याचारी शेर से बचा लिया।
कहानी की सीख(Moral): “शारीरिक ताकत से ज्यादा महत्व ‘बुद्धि’ का होता है। संकट के समय घबराने की बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए।”
2. बंदर और मगरमच्छ | The Monkey and the Crocodile Story of Panchatantra
(सीख: धोखेबाज मित्र से सावधान रहें और संकट में संयम न खोएं)
एक नदी के किनारे जामुन का एक बड़ा पेड़ था, जिस पर रक्तमुख नाम का एक बंदर रहता था। नदी में करालमुख नाम का एक मगरमच्छ रहता था। दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। बंदर रोज़ मीठे जामुन तोड़कर मगरमच्छ को खिलाता।
एक दिन मगरमच्छ कुछ जामुन अपनी पत्नी के लिए ले गया। रसीले जामुन खाकर पत्नी ने सोचा, “जो बंदर रोज़ इतने मीठे फल खाता है, उसका कलेजा (हृदय) कितना मीठा होगा!” उसने जिद पकड़ ली कि उसे बंदर का कलेजा ही खाना है।
मगरमच्छ अपनी पत्नी की जिद के आगे हार गया और उदास मन से बंदर को अपने घर दावत पर बुलाने गया। उसने बंदर को अपनी पीठ पर बैठाया और नदी के बीच ले गया। वहाँ पहुँचकर उसने बंदर को सच बता दिया।
बंदर पहले तो डर गया, लेकिन उसने तुरंत अपना दिमाग चलाया। वह बोला, “अरे मित्र! तुमने यह पहले क्यों नहीं बताया? मैं तो अपना कलेजा पेड़ की खोह में ही संभालकर आया हूँ। चलो वापस चलते हैं, मैं उसे ले आता हूँ।”
मूर्ख मगरमच्छ उसे वापस किनारे ले आया। किनारे पहुँचते ही बंदर लंबी छलांग लगाकर पेड़ पर चढ़ गया और बोला, “जाओ मूर्ख मित्र! कलेजा शरीर के अंदर होता है, पेड़ पर नहीं। आज से हमारी दोस्ती खत्म।”
कहानी की सीख(Moral): “मुसीबत आने पर संयम नहीं खोना चाहिए। ‘उपस्थिति बुद्धि’ (Presence of Mind) आपको मौत के मुँह से भी बाहर निकाल सकती है।”
3. तीन मछलियाँ | The Three Fishes Story of Panchatantra
(सीख: भविष्य के लिए पहले से तैयारी करना ही समझदारी है)
एक विशाल सरोवर में तीन मछलियाँ रहती थीं- अनागतविधाता (जो मुसीबत आने से पहले उपाय सोचे), प्रत्युत्पन्नमति (जो मुसीबत आने पर तुरंत निर्णय ले) और यद्भविष्य (जो भाग्य के भरोसे रहे)।
एक दिन कुछ मछुआरों ने बात की कि वे कल इस तालाब में जाल डालेंगे। पहली मछली (अनागतविधाता) ने यह सुना और तुरंत दूसरे तालाब में चली गई। दूसरी मछली (प्रत्युत्पन्नमति) ने सोचा, “जब जाल आएगा, तब देखा जाएगा।” तीसरी मछली (यद्भविष्य) ने कहा, “जो भाग्य में लिखा है, वही होगा। मैं कहीं नहीं जाऊँगी।”
अगले दिन मछुआरों ने जाल फेंका। जो मछली पहले ही चली गई थी, वह सुरक्षित थी। दूसरी मछली जाल में फँस गई, लेकिन उसने मरने का नाटक किया। मछुआरों ने उसे मरा हुआ समझकर पानी में फेंक दिया, और वह तैरकर भाग गई। लेकिन तीसरी मछली, जो भाग्य के भरोसे बैठी थी, जाल में फँसी और मारी गई।
कहानी की सीख(Moral): “जो लोग भविष्य की समस्याओं को भांपकर पहले से तैयारी करते हैं, वे सुरक्षित रहते हैं। भाग्य के भरोसे हाथ पर हाथ रखकर बैठने वाले अक्सर नष्ट हो जाते हैं।”
4. ब्राह्मण और नेवला | The Brahmin and the Mongoose Story of Panchatantra
(सीख: बिना विचारे जो करे, सोपा छे पछताए)
एक गाँव में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। उनके घर में एक छोटा बच्चा था और उन्होंने एक नेवला भी पाला हुआ था। वे नेवले को अपने बेटे जैसा ही मानते थे, लेकिन ब्राह्मणी को डर लगता था कि कहीं नेवला बच्चे को नुकसान न पहुँचा दे।
एक दिन ब्राह्मणी पानी भरने बाहर गई और ब्राह्मण भी किसी काम से बाहर था। घर पर सिर्फ छोटा बच्चा और नेवला थे। तभी एक जहरीला साँप घर में घुस आया और बच्चे की ओर बढ़ने लगा। नेवले ने फुर्ती से साँप पर हमला किया और उसे टुकड़ों में काट दिया।
जब ब्राह्मणी लौटी, तो उसने देखा कि नेवला दरवाजे पर बैठा है और उसका मुँह खून से सना है। उसने सोचा कि नेवले ने उसके बेटे को मार डाला है। क्रोध में आकर उसने पानी से भरा भारी घड़ा नेवले के ऊपर पटक दिया। नेवला वहीं मर गया।
अंदर जाकर जब उसने देखा कि उसका बेटा चैन से सो रहा है और पास में एक मरा हुआ साँप पड़ा है, तो वह छाती पीटकर रोने लगी। उसे अपनी जल्दबाजी पर बहुत पछतावा हुआ, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था।
कहानी की सीख(Moral): “गुस्से या जल्दबाजी में कभी कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। बिना सोचे-समझे किए गए काम का परिणाम हमेशा दुखदाई होता है।”

5. बातूनी कछुआ और दो हंस | The Talkative Tortoise Story of Panchatantra
(सीख: सही समय पर चुप रहना भी एक कला है)
एक तालाब में कम्बुग्रीव नाम का कछुआ और उसके दो हंस मित्र, संकट और विकट रहते थे। एक बार वहाँ भीषण अकाल पड़ा और तालाब सूखने लगा। हंसों ने दूसरे तालाब पर जाने का फैसला किया और कछुए को भी साथ ले जाने की तरकीब निकाली।
हंस एक लकड़ी लाए और कछुए से कहा, “तुम इस लकड़ी को बीच में से अपने मुँह से कसकर पकड़ लेना, और हम दोनों किनारों से पकड़कर उड़ चलेंगे। लेकिन खबरदार! रास्ते में अपना मुँह मत खोलना।”
योजना शुरू हुई। जब वे गाँव के ऊपर से उड़ रहे थे, तो लोग उन्हें देखकर शोर मचाने लगे, “देखो! देखो! हंस कछुए को ले जा रहे हैं।” कछुआ अपनी आदत से मजबूर था। उसे रहा नहीं गया और वह बोल पड़ा, “तुम्हें क्या परेशा…” जैसे ही उसने मुँह खोला, वह लकड़ी से छूट गया और जमीन पर गिरकर अपनी जान गँवा बैठा।
कहानी की सीख(Moral): “हमें अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। बड़ों की सलाह न मानने और बेवजह बोलने से अपना ही नुकसान होता है।”
6. रंगा सियार | The Blue Jackal Story of Panchatantra
(सीख: झूठ का पर्दाफाश एक न एक दिन ज़रूर होता है)
एक बार की बात है, एक सियार (Jackal) भोजन की तलाश में जंगल से भटककर शहर में आ गया। वहाँ कुत्तों ने उसे दौड़ा लिया। अपनी जान बचाने के लिए सियार धोबियों के एक घर में घुस गया और वहाँ रखे ‘नीले रंग’ के बड़े ड्रम में कूद गया।
जब वह बाहर निकला, तो उसका पूरा शरीर नीले रंग का हो चुका था। वह वापस जंगल पहुँचा, तो सभी जानवर उसे देखकर डर गए। उन्हें लगा कि यह कोई अद्भुत और शक्तिशाली जानवर है, जो दूसरे लोक से आया है। सियार ने उनकी मूर्खता को भांप लिया और कहा, “मुझे भगवान ने तुम सबका राजा बनाकर भेजा है।”
शेर, बाघ और हाथी जैसे बड़े जानवर भी उसकी सेवा करने लगे। सियार मजे से राज करने लगा और उसने अपने ही भाई-बंधुओं (सियारों) को जंगल से बाहर निकाल दिया, ताकि उसकी पोल न खुल जाए।
एक रात, दूर कहीं सियारों का एक झुंड जोर-जोर से हुआं-हुआं करने लगा। अपनी जाति की आवाज़ सुनकर नीला सियार खुद को रोक न सका। उसने भी जोर-जोर से हुआं-हुआं करना शुरू कर दिया। उसकी आवाज़ सुनते ही शेर और बाघ समझ गए कि यह कोई भगवान का भेजा जानवर नहीं, बल्कि एक मामूली सियार है। गुस्से में सभी जानवरों ने मिलकर उसे वहीं मार डाला।
कहानी की सीख(Moral): “नकली भेष बनाकर आप कुछ समय तक तो सबको धोखा दे सकते हैं, लेकिन असलियत छिपती नहीं है। अपनी असलियत पर गर्व करना चाहिए।”
7. हाथी और चूहे | The Elephants and the Mice Story of Panchatantra
(सीख: कभी किसी को छोटा समझकर कम न आंकें)
एक जंगल में एक बहुत पुरानी झील थी। उसके पास चूहों का एक बड़ा डेरा था। एक दिन हाथियों का झुंड पानी पीने के लिए उस झील की ओर आया। हाथियों के भारी-भरकम पैरों के नीचे दबकर कई चूहे मारे गए।
चूहों का राजा हाथियों के राजा (गजराज) के पास गया और विनती की, “महाराज, कृपया आप अपना रास्ता बदल लें, नहीं तो हमारा पूरा वंश खत्म हो जाएगा। अगर आप ऐसा करेंगे, तो मुसीबत के समय हम भी आपके काम आएंगे।” गजराज हँसा, “तुम नन्हे चूहे हमारे क्या काम आओगे?” फिर भी, दया करके उसने रास्ता बदल लिया।
कुछ समय बाद, राजा के शिकारियों ने हाथियों को पकड़ने के लिए मजबूत जाल बिछाए। गजराज और उसका पूरा झुंड जाल में फँस गया। वे जितना जोर लगाते, जाल उतना ही कसता जाता। तभी गजराज को चूहों की याद आई। उसने एक हाथी को चूहों को बुलाने भेजा।
चूहे तुरंत आए और अपने पैने दाँतों से रस्सियों को काट दिया। देखते ही देखते विशालकाय हाथी आज़ाद हो गए। गजराज ने चूहों का धन्यवाद किया और उस दिन उन्हें समझ आया कि दोस्ती में कद-काठी नहीं देखी जाती।
कहानी की सीख(Moral): “कभी किसी को छोटा या कमजोर समझकर उसका अपमान नहीं करना चाहिए। वक्त आने पर सुई भी वो काम कर सकती है जो तलवार नहीं कर सकती।”
पंचतंत्र के 5 भाग सिद्धांत का वर्णन(Panchtantra ki kahaniyan)
इन पाँच भागों में जीवन के हर पहलू- दोस्ती, दुश्मनी, युद्ध और बुद्धिमानी को कहानियों के जरिए समझाया गया है:
1. मित्रभेद(Mitra-bheda) – दोस्तों का अलग होना
- विषय: यह भाग सबसे लंबा और महत्वपूर्ण है।
- सीख: इसमें बताया गया है कि कैसे दो गहरे दोस्तों के बीच गलतफहमी पैदा करके उन्हें अलग किया जा सकता है। इसमें शेर और बैल की प्रसिद्ध कहानी आती है, जहाँ एक चालाक सियार उनकी दोस्ती तुड़वा देता है। यह हमें सिखाता है कि “चुगलखोरों से सावधान रहें।”
2. मित्रलाभ(Mitra-labha) – दोस्तों का लाभ
- विषय: अच्छे दोस्त कैसे बनाएं और उनसे क्या लाभ होता है।
- सीख: इस भाग में कबूतर, चूहा, कछुआ और हिरण की कहानी है, जो मिलकर एक-दूसरे की जान बचाते हैं। यह सिखाता है कि “संगठन में ही शक्ति है” और सच्चे दोस्त ही सबसे बड़ी संपत्ति हैं।
3. काकोलुकीयम्(Kakolukiyam) – युद्ध और संधि
- विषय: कौवे और उल्लू की दुश्मनी (War and Peace)।
- सीख: इसमें बताया गया है कि शत्रु के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। क्या शत्रु से संधि (Friendship) करनी चाहिए या युद्ध? यह भाग सिखाता है कि “शत्रु को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए और न ही उस पर आँख मूंदकर भरोसा करना चाहिए।”
4. लब्धप्रणाश(Labdhapranasam) – मिला हुआ खो देना
- विषय: हाथ आई चीज का निकल जाना।
- सीख: इसमें वे कहानियाँ हैं जहाँ कोई व्यक्ति अपनी मूर्खता या घमंड के कारण जीती हुई बाजी हार जाता है। (जैसे मगरमच्छ और बंदर की कहानी)। यह सिखाता है कि “सिर्फ पाना काफी नहीं है, जो पाया है उसे बचाकर रखना भी एक कला है।”
5. अपरीक्षित कारक(Aparikshita kaarakam) – बिना सोचे-समझे काम करना
- विषय: जल्दबाजी के परिणाम।
- सीख: इसमें बिना जाँच-पड़ताल किए गए कार्यों के बुरे नतीजों के बारे में बताया गया है। (जैसे ब्राह्मण और नेवले की कहानी)। यह हमें सबसे बड़ी सीख देता है- “बिना विचारे जो करे, सो पाछे पछताए।”
आज के दौर में पंचतंत्र क्यों जरूरी है?
भले ही ये कहानियाँ जंगल और जानवरों पर आधारित हैं, लेकिन आज के कॉर्पोरेट जगत (Corporate World), राजनीति और सामाजिक जीवन में भी ये नियम सटीक बैठते हैं।
- किसे दोस्त बनाना है?
- किस पर भरोसा नहीं करना है?
- मुसीबत में दिमाग कैसे चलाना है?
यह सब हमें पंचतंत्र बहुत ही सरलता से सिखा देता है।
लेखक का संदेश
नमस्ते पाठकों,
मेरा नाम साहिल है। एक लेखक के तौर पर मेरा हमेशा से यह मानना रहा है कि कहानियाँ केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन के अनुभवों का निचोड़ होती हैं।
आज के डिजिटल युग में, जहाँ हम अक्सर अपनी जड़ों को भूलते जा रहे हैं, मैंने “पंचतंत्र की 5 कहानियाँ” के माध्यम से एक छोटी सी कोशिश की है। इन कहानियों को दोबारा आप तक पहुँचाने का मेरा मुख्य उद्देश्य यह है कि हम विष्णु शर्मा द्वारा रचित उन अनमोल जीवन मंत्रों को फिर से याद करें, जो हमें ईमानदारी, सूझबूझ और एकता का पाठ सिखाते हैं।
मेरा विश्वास है कि साहिल (यानी मेरे) द्वारा संकलित यह “पंचतंत्र की 5 कहानियाँ” न केवल बच्चों को सही संस्कार देंगी, बल्कि बड़ों को भी अपने बचपन के सुनहरे दिनों की याद दिलाएँगी। उम्मीद है कि ये कहानियाँ आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित होंगी।
सप्रेम, साहिल
और पढ़े:-
निष्कर्ष (Conclusion)
पंचतंत्र की ये 5 कहानियाँ (Panchatantra ki 5 Kahaniyan) हमें सिखाती हैं कि जीवन में केवल किताबी ज्ञान ही काफी नहीं है, बल्कि व्यावहारिक बुद्धि (Common Sense), सच्ची मित्रता, और समय की परख होना बहुत ज़रूरी है। हम हमेशा आपके लिए ऐसा ही ज्ञानवर्धक और रोचक कंटेंट लाते रहेंगे। अगर आपको ये कहानियाँ पसंद आईं, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के बच्चों के साथ जरूर शेयर करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न(FAQ)
Q1. पंचतंत्र किसने लिखा था?
उत्तर: पंचतंत्र की रचना महान पंडित विष्णु शर्मा ने लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में की थी।
Q2. पंचतंत्र का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘पंच’ का अर्थ है पाँच और ‘तंत्र’ का अर्थ है सिद्धांत या नियम। यानी जीवन जीने के पाँच सिद्धांत।
Q3. पंचतंत्र की कहानियाँ बच्चों के लिए क्यों जरूरी हैं?
उत्तर: ये कहानियाँ बच्चों में नैतिकता, सही-गलत की पहचान और कठिन परिस्थितियों से निपटने की समझ विकसित करती हैं।
Q4. पंचतंत्र की सबसे प्रसिद्ध कहानी कौन सी है?
उत्तर: वैसे तो सभी कहानियाँ बेहतरीन हैं, लेकिन “बंदर और मगरमच्छ”, “शेर और खरगोश”, और “ब्राह्मण और नेवला” सबसे ज्यादा पढ़ी और पसंद की जाने वाली कहानियाँ हैं।
Q5. क्या पंचतंत्र की कहानियाँ केवल बच्चों के लिए हैं?
उत्तर: बिल्कुल नहीं! हालाँकि इसमें पात्र जानवर हैं, लेकिन इसकी सीख (Morals) वयस्कों (Adults), मैनेजरों और लीडर्स के लिए भी उतनी ही उपयोगी है। यह हमें सिखाता है कि किस पर भरोसा करें, दुश्मन को कैसे पहचानें और मुश्किल समय में दिमाग का इस्तेमाल कैसे करें।