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स्वर और व्यंजन | Vowels & Consonants of Hindi

हिंदी भाषा को सही तरीके से पढ़ने, लिखने और बोलने की शुरुआत स्वर (Vowels) और व्यंजन (Consonants) को समझने से होती है। स्वर और व्यंजन हिंदी वर्णमाला की सबसे मूल इकाइयाँ (fundamental units) हैं, जिनके आधार पर शब्द बनते हैं, वाक्य बनते हैं और भाषा को आकार मिलता है। यदि इन दोनों swar aur vyanjan की स्पष्ट समझ नहीं हो, तो सही उच्चारण, सही वर्तनी और पढ़ने-लिखने में कठिनाई आती है।

स्वर और व्यंजन किसे कहते हैं? | Swar aur Vyanjan Kise kahate Hain

स्वर स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं जो स्वयं उच्चारित हो सकती हैं, जबकि व्यंजन ध्वनियाँ स्वर के बिना पूर्ण नहीं होतीं। इसलिए जब हम किसी अक्षर या शब्द का उच्चारण करते हैं, तो वास्तव में स्वर और व्यंजन मिलकर ध्वनि बनाते हैं। यही ज्ञान

स्वर और व्यंजन
  • सही पढ़ने की क्षमता विकसित करता है
  • लिखावट (spelling) सुधारता है
  • उच्चारण को स्पष्ट बनाता है
  • भाषा की बुनियादी समझ मजबूत करता है

यह विशेष रूप से बच्चों, शुरुआती विद्यार्थियों और हिंदी सीखने वाले विदेशी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह हिंदी भाषा सीखने की पहली सीढ़ी |

स्वर-व्यंजन को समझने के बाद छात्र सरल से कठिन शब्दों तक सुगमता से आगे बढ़ सकते हैं।

स्वर (Swar) क्या हैं? | Swar aur Vyanjan Types

स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिन्हें बोलने के लिए किसी अन्य अक्षर या सहायक ध्वनि की आवश्यकता नहीं होती। यानी स्वर अकेले उच्चारित किए जा सकते हैं, इसलिए इन्हें स्वतंत्र ध्वनियाँ कहा जाता है। हिंदी भाषा में स्वर शब्द निर्माण, उच्चारण और वर्तनी (spelling) का आधार होते हैं।

स्वर की परिभाषा

“वे अक्षर जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से बिना किसी सहायक ध्वनि के किया जा सके, उन्हें स्वर कहते हैं।”

उदाहरण के लिए:
अ, इ, ऊ, ओ, ए — ये सभी अक्षर अकेले उच्चारित किए जा सकते हैं।

इसके विपरीत व्यंजन को उच्चारित करने के लिए स्वर की आवश्यकता होती है, जैसे:
क → “क” तभी बनता है जब उसके साथ “अ” स्वर जुड़ता है।

हिंदी में स्वर कितने होते हैं? | Standard List of Vowels | Swar aur Vyanjan

हिंदी में कुल 11 स्वर माने जाते हैं:

क्रमस्वर
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11

ये स्वर हिंदी भाषा में सभी ध्वनियों के मूल स्रोत हैं।

स्वरों के प्रकार (Types of Vowels) | Swar aur Vyanjan

हिंदी में स्वर मुख्य रूप से तीन आधारों पर वर्गीकृत किए जाते हैं:

1. ह्रस्व स्वर (Short Vowels)

इनका उच्चारण कम समय में होता है:




उदाहरण:
अमल, मिठाई, दुख

2. दीर्घ स्वर (Long Vowels) | Swar aur Vyanjan

इनका उच्चारण comparatively अधिक समय लेता है:






उदाहरण:
आसमान, ईश्वर, फूल, मेरा, दोस्त

3. प्लुत स्वर (Prolonged / Extended Sound) | Swar aur Vyanjan

इनका उच्चारण और विस्तृत होता है और प्रायः वैदिक संस्कृत में मिलता है।
उदाहरण: आऽऽ, ईऽऽ आदि
(आधुनिक हिंदी में सामान्यतः प्रयोग नहीं होते)

मात्राओं और स्वर का संबंध – A Key Concept

स्वर जब किसी व्यंजन के साथ मिलते हैं, तो वे मात्रा के रूप में बदल जाते हैं।

स्वरमात्रा
(कोई मात्रा नहीं – inherent)
ि

उदाहरण:

अक्षर संयोजनशब्द
क + ा = काकाम
त + ि = तितिरंगा
म + ो = मोमेरा

व्यंजन (Vyanjan) क्या हैं? | Swar aur Vyanjan in Hindi

स्वर की तरह ही हिंदी वर्णमाला का दूसरा महत्वपूर्ण आधार है—व्यंजन। व्यंजन वे अक्षर हैं जिन्हें स्वर के बिना स्पष्ट रूप से उच्चारित नहीं किया जा सकता। व्यंजन ध्वनियों को स्वर का सहारा चाहिए और जब स्वर से मिलकर ध्वनि बनती है तभी शब्द का निर्माण संभव होता है।

व्यंजन की परिभाषा

“वे अक्षर जिनका उच्चारण अपने आप नहीं हो सकता और जिन्हें बोलने के लिए स्वर की आवश्यकता होती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।”

उदाहरण:

क, ख, ग को अकेले बोलेंगे तो ध्वनि अधूरी लगेगी,
लेकिन—
क + अ = क
ग + उ = गु
म + ओ = मो

यानी व्यंजन स्वर से मिलते ही स्पष्ट ध्वनि बनाते हैं।

हिंदी में व्यंजन कितने होते हैं? | Swar aur Vyanjan in Hindi

हिंदी में सामान्यतः 33 व्यंजन माने जाते हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर संयुक्त अक्षर या विशेष ध्वनियों को मिलाकर संख्या 35 या 41 भी कही जाती है।

सबसे मान्य सूची नीचे दी गई है:

व्यंजन सूची (Vyanjan List in Hindi)

क्रमव्यंजन
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33

स्वर और व्यंजन में अंतर | Differences Between Vowels and Consonants

अंतर का आधारस्वर (Vowels)व्यंजन (Consonants)
1. परिभाषाये वे ध्वनियाँ हैं जिनका उच्चारण स्वतंत्र रूप से, बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के होता है।ये वे ध्वनियाँ हैं जिनका उच्चारण स्वरों की सहायता से ही संभव होता है।
2. उच्चारण प्रक्रियाफेफड़ों से निकली वायु मुख में बिना किसी रुकावट (बाधा) के बाहर निकलती है।वायु मुख के किसी भाग (जैसे जीभ, तालु, दाँत, या ओठ) में रुकावट या घर्षण उत्पन्न करती है।
3. स्वतंत्रताये वर्ण स्वतंत्र होते हैं।ये वर्ण परतंत्र (आश्रित) होते हैं।
4. लेखन रूपइनका लेखन रूप केवल स्वर ही होता है (जैसे: अ, इ)।मूल रूप में ये हलंत के साथ लिखे जाते हैं (जैसे: क्, च्, ट्), जो इनमें स्वर की अनुपस्थिति दर्शाता है।
5. मात्राये अपने आप में पूर्ण ध्वनियाँ हैं, इसलिए इनकी मात्राएँ नहीं होती हैं।जब व्यंजन में स्वर मिलता है, तो स्वर मात्रा के रूप में व्यंजन के साथ जुड़ जाता है (जैसे: क + आ = का)।
6. संख्या (हिंदी में)हिंदी में इनकी कुल संख्या 11 है।हिंदी में इनकी मूल संख्या 33 है।
7. उदाहरणअ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औक, ख, ग, घ, च, छ, ज, झ, ट, ठ, आदि।
स्वर और व्यंजन | Swar aur Vyanjan

भेदों के आधार पर व्यंजन का वर्गीकरण | Swar aur Vyanjan in Hindi

हिंदी व्यंजन निम्न वर्गों में विभाजित होते हैं:

1. स्पर्श व्यंजन (Touch Consonants)

जिनका उच्चारण किसी अंग से स्पर्श करके होता है
उदाहरण समूह:

  • क, ख, ग, घ, ङ
  • च, छ, ज, झ, ञ
  • ट, ठ, ड, ढ, ण
  • त, थ, द, ध, न
  • प, फ, ब, भ, म

2. अंतःस्थ व्यंजन (Semi-vowels / Internal Articulation)

उदाहरण:





इनका उच्चारण स्वर और व्यंजन के बीच होता है।

3. ऊष्म व्यंजन (Fricatives)

उदाहरण:





इनमें हवा के घर्षण पर ध्वनि बनती है।

विशेष व्यंजन (Often Included Separately)

कई स्थानों पर इन ध्वनियों को अलग माना जाता है:

  • क्ष
  • त्र
  • ज्ञ

ये संयुक्त व्यंजन हैं और शब्दों में बहुत उपयोग होते हैं:

  • क्षत्रिय
  • त्रिकोण
  • ज्ञान

वर्णमाला | स्वर और व्यंजन का संयोजन (Hindi Alphabet System)

हिंदी वर्णमाला स्वर और व्यंजन से मिलकर बनती है। स्वर ध्वनि का आधार हैं और व्यंजन ध्वनि का ढाँचा बनाते हैं। जब स्वर और व्यंजन मिलते हैं, तब अक्षर और आगे चलकर शब्द बनते हैं। इसलिए वर्णमाला को भाषा की “बुनियादी इकाई” कहा जाता है।

स्वर और व्यंजन

वर्णमाला क्या होती है? | हिंदी में स्वर और व्यंजन

“भाषा के सभी अक्षरों की क्रमबद्ध सूची को वर्णमाला कहते हैं।”

हिंदी वर्णमाला तीन मुख्य भागों में विभाजित होती है:

 स्वर

 व्यंजन

अन्य चिह्न / विशेष ध्वनियाँ (मात्राएँ, अनुस्वार, विसर्ग, चंद्रबिंदु आदि)

हिंदी वर्णमाला की मान्य संख्या

सामान्य रूप से:

  • 11 स्वर
  • 33 व्यंजन

को जोड़कर 44 अक्षर माने जाते हैं।

लेकिन यदि विशेष ध्वनियों को जोड़ा जाए, तो संख्या 48 से 52 तक हो जाती है।

इसका कारण:

  • संयुक्त अक्षरों (क्ष, त्र, ज्ञ)
  • स्वर रूपांतरण
  • और पुराने प्रयोग वाले अक्षरों का सम्मिलन

हिंदी वर्णमाला तालिका (Alphabet Table) | Swar aur Vyanjan in Hindi

स्वर (Vowels)

अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ

व्यंजन (Consonants)

क, ख, ग, घ, ङ
च, छ, ज, झ, ञ
ट, ठ, ड, ढ, ण
त, थ, द, ध, न
प, फ, ब, भ, म
य, र, ल, व
श, ष, स, ह

संयुक्त व्यंजन (Compound Letters)

  • क्ष
  • त्र
  • ज्ञ

इनका उच्चारण दो व्यंजनों के संयोजन से होता है।

उदाहरण:

  • क्षत्रिय
  • त्रिशूल
  • ज्ञान

वर्णमाला क्यों महत्वपूर्ण है? | हिंदी में स्वर और व्यंजन

वर्णमाला:

  • किसी भी भाषा सीखने की सबसे पहली सीढ़ी है
  • उच्चारण, स्पेलिंग और शब्द निर्माण का आधार देती है
  • बच्चों के लिए भाषा सीखने का दैनिक अभ्यास बनती है
  • साहित्य, व्याकरण और लिखावट की समझ विकसित करती है

यदि वर्णमाला स्पष्ट समझ ली जाए तो आगे:

  • मात्रा प्रयोग,
  • संयुक्त अक्षर,
  • वाक्य रचना,
  • व्याकरण नियम—

सब कुछ सीखना आसान हो जाता है।

वर्णमाला सीखने के लिए सुझाव | हिंदी में स्वर और व्यंजन

 रोज लिखने और पढ़ने का अभ्यास
  अक्षरों की ध्वनियाँ सुनकर बोलने का प्रयास
  फ्लैशकार्ड, चार्ट या प्रिंटेड शीट उपयोग करें
  शब्दों का उच्चारण जोर से पढ़ें
  स्वर-व्यंजन मिलाकर नए शब्द बनाएं

उदाहरण:

अक्षर संयोजनशब्द
क + ाका (काम)
क + ीकी (कीमत)
म + ोमो (मोसमी)

इससे बच्चे और beginners तेजी से भाषा समझते हैं।

स्वर और व्यंजन कैसे मिलकर शब्द बनाते हैं? (How Swar & Vyanjan Combine to Form Words)

हिंदी भाषा में किसी भी स्पष्ट ध्वनि, अक्षर या शब्द की रचना स्वर और व्यंजन के मेल से होती है। व्यंजन अकेले उच्चारित नहीं होते, इसलिए जब उनमें स्वर जुड़ता है, तब एक संपूर्ण ध्वनि बनती है, और उसी से शब्द बनते हैं। यही हिंदी भाषा का सबसे महत्वपूर्ण नियम है।

1. व्यंजन + स्वर = पूरा अक्षर | हिंदी में स्वर और व्यंजन

उदाहरण:

व्यंजनस्वरअक्षर
नु
ते

अर्थ बदल जाते हैं:

क + अ = क (एक अक्षर)
क + आ = का (भिन्न अर्थ)

2. स्वर मात्रा लगने पर ध्वनि बदलती है

जब किसी व्यंजन के साथ स्वर का प्रयोग लिखा जाता है, तो वह मात्रा के रूप में आता है।

उदाहरण:

व्यंजनमात्राअक्षर
का
िकि
की
कु
कू
के
कै
को
कौ

सभी अक्षर अलग ध्वनि और अर्थ दर्शाते हैं।

3. मात्रा लिखने का स्थान अलग-अलग होता है | हिंदी में स्वर और व्यंजन

हिंदी में मात्राएँ:

  • अक्षर से पहले
  • अक्षर के बाद
  • नीचे
  • ऊपर

कभी-कभी संयोजन में लिखी जाती हैं।

उदाहरण:

 ि (इ की मात्रा) अक्षर से पहले लगती है
कि, निंदा, चिड़िया

 ा (आ की मात्रा) अक्षर के बाद लगती है
का, राजा, खाना

 ु (उ की मात्रा) नीचे लगती है
कु, गुड्डा

 े (ए की मात्रा) ऊपर लगती है
गे, सेब

4. मात्रा बदलते ही अर्थ बदलता है | हिंदी में स्वर और व्यंजन

उदाहरण:

  • कल = yesterday
  • काल = era
  • केल = banana (regional)
  • बल = strength
  • बाल = hair
  • बिल = hole

स्वर-मात्रा भाषा का अर्थ निर्धारण करती है।

5. व्यंजन + स्वर मिलकर शब्द बनाना (Step-by-Step Examples)

उदाहरण 1

क + आ = का
का + म = काम

उदाहरण 2

म + ि = मि
ति + त = तित
लेकिन सही शब्द बनता है: मित (संयोजन बदलकर)

उदाहरण 3

च + े = चे
चे + त = चेत

  • ना = चेतना

6. शब्द बनाने की प्रक्रिया बच्चों के लिए कैसे आसान होती है?

 पहले अक्षर पहचान: क, म, र
  फिर स्वर-मात्रा जोड़ना: का, मी, री
  फिर शब्द: काम, मीरा, रीति

शुरुआती विद्यार्थियों को:

 flash cards
chart reading
  tracing sheets

देने से सीखना तेज होता है।

7. स्वर-व्यंजन संयोजन पढ़ने की सही तकनीक

  • पहले ध्वनि बोलें: क
  • फिर स्वरों का क्रम: का, कि, की, कु…
  • फिर शब्द: कल, किताब, कील, कुछ

यह phonetics आधारित learning कहलाती है।

8. स्वर-व्यंजन संयोजन पढ़कर लेखन सुधरता है

बच्चों में सुधार दिखता है:

उच्चारण में
स्पेलिंग में
शब्द पहचान में
पढ़ाई की fluency में

बुनियादी भाषा कौशल इसी नियम पर निर्भर करता है।

मात्राओं का उपयोग और प्रकार | Types & Usage of Matras

जब स्वर (Swar) किसी व्यंजन (Vyanjan) के साथ लिखे जाते हैं, तो वे अपने मूल रूप में नहीं लिखे जाते, बल्कि मात्रा (Matra) के रूप में बदल जाते हैं। किसी भी व्यंजन के साथ मात्राएँ जुड़ने से उसकी ध्वनि बदल जाती है, और उसी से अलग-अलग शब्द बनते हैं।

मात्रा क्या है?

“स्वर का छोटा, रूपांतरित चिन्ह जिसे व्यंजन के साथ जोड़कर लिखा जाता है, उसे मात्रा कहते हैं।”

उदाहरण:

  • क + ा = का
  • क + ी = की
  • म + ू = मू

हिंदी में सभी मात्राएँ (Matra Table)

स्वरमात्राउदाहरण
— (कोई मात्रा नहीं)क = क (Ka)
का, राम
िकि, गिरी
की, पीली
कु, छुट्टी
कू, सूरज
कृपा, कृत
के, ले
कै, नै
वो, सोना
कौ, पौधा

मात्राएँ कहाँ लगती हैं? (Placement Rules)

मात्राएँ हमेशा एक ही स्थान पर नहीं लगतीं।

1. अक्षर से पहले

 इ और ई की छोटी मात्रा
उदाहरण:
कि, चिड़िया, निंदा

2. अक्षर के बाद

 आ, ई, ऊ, ए, ओ, ऐ, औ
उदाहरण:
का, की, कू, के, को, कै, कौ

3. अक्षर के नीचे

 उ, ऊ की छोटी मात्रा
उदाहरण:
कु, गुरु, पुस्‍तक

4. अक्षर के ऊपर

 ए-ओ परिवार की मात्राएँ
उदाहरण:
गे, से, सो

मात्रा बदलते ही अर्थ बदल जाता है:-

शब्दअर्थ
बलताकत
बालबाल (Hair)
बिलछेद
बोलकहना
बोल (छोटी मात्रा)सच में अलग ध्वनि

उदाहरण:

  • कल → yesterday
  • काल → युग
  • कौल → वचन/प्रतिज्ञा

ये अंतर शिक्षा में बहुत महत्वपूर्ण हैं।

मात्रा सीखने की आसान तकनीकें (For Kids & Beginners)

स्वर-व्यंजन फ्लैश कार्ड
कॉपी में बार-बार लिखने का अभ्यास
  अक्षर-ध्वनि बोलते हुए लिखना
चित्रों के साथ शब्द पहचान

जैसे:

आम → आ (आ की मात्रा)
हाथ → ा + ठ = ठा

मात्रा से शब्द निर्माण (Examples) | Step-wise Pattern:


    • ा = मा
    • ला = माला

    • ु = कु
    • प = कुप (incorrect)
      परंतु सही → कपड़ा जैसी संरचना में

मात्राओं का महत्व (Why Matras Are Important?)

मात्राएँ:

सही वर्तनी (spelling) बनाती हैं
ध्वनि की पहचान स्पष्ट करती हैं
शब्द रचना का आधार हैं
उच्चारण शुद्ध करती हैं
हिंदी पढ़ना-लिखना आसान बनाती हैं

भाषा विज्ञान के अनुसार, मात्राएँ phonetic clarity देती हैं।

स्वर-व्यंजन सीखते समय होने वाली सामान्य गलतियाँ (Common Mistakes Learners Make)

हिंदी भाषा सीखने वाले बच्चे, शुरुआती विद्यार्थी, और विदेशी learners अक्सर स्वर और व्यंजन की समझ में कुछ सामान्य गलतियाँ करते हैं। इन गलतियों को समझने से सीखना आसान होता है, और उच्चारण व लिखावट दोनों में सुधार आता है।

1. स्वर और मात्रा को एक जैसा मान लेना

कई विद्यार्थी सोचते हैं कि:

अ = ा
इ = ि
ई = ी

जबकि—

  • स्वर एक पूरा अक्षर है
  • मात्रा उसका छोटा लिखा जाने वाला रूप है

उदाहरण:

स्वर = इ (अलग अक्षर)
मात्रा = ि (किसी अक्षर से पहले लगती है)

2. मात्रा के स्थान को गलत लगाना

सबसे आम गलती:

 ि की मात्रा अक्षर के पहले लगानी चाहिए
लेकिन विद्यार्थी बाद में लगाते हैं

गलत → कि
सही → कि (ि → क से पहले)

इसी तरह:

  • उ की मात्रा अक्षर के नीचे लगती है → क
  • ऊ की छोटी मात्रा नीचे → क

3. संयुक्त व्यंजन को गलत पढ़ना

जैसे—

क्ष, ज्ञ, त्र

सीधे पढ़ने में:

  • क + ष = क्ष नहीं
  • ज + ज्ञ = ज्ञ नहीं

सही उच्चारण:

  • क्ष = ‘क्ष’ या ‘क्श’
  • ज्ञ = ‘ग्य’
  • त्र = ‘त्र’ (t+r mix)

उदाहरण शब्द:

  • क्षत्रिय
  • ज्ञान

उनका सही phonetic रूप नहीं सीखने पर छात्र गलत उच्चारण करते हैं।

4. बिना स्वर लगाए व्यंजन बोलना

क, ग, प, त जैसे अक्षरों को विद्यार्थी अकेले उच्चारित करते हैं:

 क
  ग

यह उच्चारण अधूरा है।

सही तरीका:

क + अ = क
ग + अ = ग

हर व्यंजन में पहले से अ स्वर निहित होता है (inherent vowel rule)

5. स्वर लंबाई (Short vs. Long) में फर्क न करना

उदाहरण:

इ (short)
ई (long)

उ (short)
ऊ (long)

तुलना:

सि → Si
सी → See
सु → Su
सू → Soo

अंतर दिखता है!

6. समान ध्वनियों में भ्रम होना

जैसे:

स — श
ल — ळ
न — ण
त — थ

गलत उच्चारण से अर्थ भी बदल सकते हैं।

उदाहरण:

फल = fruit
फ़ल = result (Persian-origin words)

7. मात्रा लगाते समय शब्द बिगड़ जाना

उदाहरण:

गलत → बिड़ा
सही → बीड़ा

गलत → सिच्चा
सही → शिक्षा

संयुक्त व्यंजन पढ़कर लिखना जरूरी है।

इन गलतियों से बचने के उपाय

अक्षर-ध्वनि एक साथ बोलने का अभ्यास
सही उच्चारण सुनकर बोलें
  मात्रा-वाले शब्द रोज लिखें
चार्ट, फ्लैश-कार्ड, नोटबुक प्रशिक्षण
सरल शब्द → कठिन शब्द progression अपनाएँ

निष्कर्ष:-

स्वर और व्यंजन हिंदी भाषा की सबसे बुनियादी इकाइयाँ हैं। इन्हीं से अक्षर बनते हैं, अक्षरों से शब्द, और शब्दों से पूरा वाक्य। इसलिए हिंदी को सही तरीके से पढ़ने, लिखने और बोलने की शुरुआत इन्हें सही ढंग से समझने से होती है।

स्वर स्वतंत्र ध्वनियाँ हैं, जबकि व्यंजन तभी पूर्ण ध्वनि बनाते हैं जब उनके साथ स्वर जुड़ता है। इसी कारण मात्रा, उच्चारण और संयोजन के नियमों की समझ बहुत जरूरी हो जाती है। कई विद्यार्थी शुरुआत में मात्रा लगाने, संयुक्त व्यंजन पहचानने, और उच्चारण में गलती करते हैं, लेकिन अभ्यास से इन्हें आसानी से ठीक किया जा सकता है।

इस ब्लॉग में हमने स्वर, व्यंजन, मात्रा प्रयोग, वर्तनी के नियम, और सामान्य गलतियाँ विस्तार से समझीं। यदि विद्यार्थी रोज़ अभ्यास करें, अक्षरों को बोलते हुए लिखें, चार्ट का उपयोग करें और उदाहरणों के साथ सीखें, तो हिंदी भाषा का आधार मजबूत होता है।

और पढ़ें:-

सर्वनाम किसे कहते हैं?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1 स्वर क्या होते हैं?

स्वर वे अक्षर होते हैं जिन्हें बिना किसी सहायक ध्वनि के स्वतंत्र रूप से उच्चारित किया जा सकता है। उदाहरण: अ, इ, ऊ, ए, ओ।

Q2 व्यंजन क्या होते हैं?

व्यंजन वे अक्षर होते हैं जिन्हें बोलने के लिए स्वर की आवश्यकता होती है। जैसे— क, ग, त, द। स्वर से मिलकर ही इनका पूर्ण उच्चारण होता है।

Q3 हिंदी में कितने स्वर होते हैं?

हिंदी में कुल 11 स्वर माने जाते हैं-
अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ।

Q4 हिंदी में कितने व्यंजन होते हैं?

सामान्य तौर पर हिंदी में 33 व्यंजन माने जाते हैं।
कुछ स्थानों पर संयुक्त व्यंजन और अन्य ध्वनियों को जोड़कर संख्या 35 से 41 तक भी मानी जाती है।

Q5 स्वर और मात्रा में क्या अंतर है?

स्वर एक पूरा अक्षर होता है, जबकि मात्रा स्वर का छोटा रूप है जो व्यंजन के साथ लगकर शब्द बनाती है।
उदा.: इ = स्वर, ि = मात्रा।

Q6 ‘ि’ की मात्रा अक्षर से पहले क्यों लगती है?

‘इ’ (ि) की मात्रा अक्षर से पहले केवल एक लेखन परंपरा के रूप में लगती है, जबकि इसका उच्चारण उस अक्षर के बाद होता है। इसका मुख्य कारण इस ध्वनि का ह्रस्व (छोटा) और शीघ्र उच्चारण है।